मछुआरों के लिए नई पहचान: अब क्यूआर कोड वाला ‘फिशर आईडी कार्ड’ अनिवार्य

 

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग और मछुआरों की सहायता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है। इन नियमों का मकसद मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे स्तर के मछुआरों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नए बदलावों का मकसद विदेशी जहाजों को भारतीय जलसीमा में मछली पकड़ने से रोकना भी है।

क्या है नए नियमों की खास बातें?
सरकार की ओर से बनाए गए नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी विदेशी मछली पकड़ने वाला जहाज भारतीय समुद्री सीमा में मछली नहीं पकड़ सकेगा। इससे देश के छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा होगी। नए नियमों में यह भी कहा गया है कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अब मछुआरा सहकारी समितियों और मछली पालक उत्पादक संगठनों (FFPOs) को प्राथमिकता दी जाएगी। ये संगठन आधुनिक तकनीक से लैस नावों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

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मछुआरों से जुड़ी सरकार की नई व्यवस्था में ‘मदर-चाइल्ड वेसल’ की भ्ी अवधारणा लाई गई है। इसकी सहायता से समुद्र के बीच में ही मछलियों का आदान-प्रदान संभव होगा। यह व्यवस्था खासकर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपों के लिए फायदेमंद साबित होगी। यह क्षेत्र भारत के ईईजेड का 49% हिस्सा रखते हैं।

सरकार की ओर से अधिसूचित नए नियमों में पर्यावरण की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। नए नियमों में एलईडी लाइट से मछली पकड़ना, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक प्रथाओं पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, मछलियों को पड़नने के लिए कानूनी रूप से उनकी न्यूनतम लंबाई तय की जाएगी और राज्यों के साथ मिलकर मत्स्य प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी।

मछुआरों को अब एक्सेस पास भी जारी किया जाएगा। अब बड़े और मोटर चालित जहाजों को EEZ में मछली पकड़ने के लिए ‘एक्सेस पास’ लेना होगा। यह पास मुफ्त में ReALCRaft पोर्टल से ऑनलाइन जारी किया जएएगा। छोटे और पारंपरिक मछुआरों को इससे छूट दी गई है। नए नियमों में कहा गया है कि सभी गहरे समुद्र में जाने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, मछुआरों को QR कोड वाले आधार या फिशर ID कार्ड दिए जाएंगे। इससे सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में मदद मिलेगी।

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निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
ReALCRaft पोर्टल को एमपीईडीए और ईआईसी से जोड़ा जा रहा है। इससे मछलियों की पकड़ और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी किए जा सकें। इससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

मछुआरों को मिलेगा सरकारी सहयोग

सरकार मछुआरों को ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय दौरे, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में मदद देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलकृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के तहत कर्ज की सुविधा भी दी जाएगी।

भारत की समुद्री ताकत
भारत के पास 11,099 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और 23 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है, जो 50 लाख से ज्यादा मछुआरों की आजीविका का आधार है। भारत मछली उत्पादन और जलकृषि में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, और हर साल करीब 60,000 करोड़ रुपये का समुद्री उत्पाद निर्यात करता है।

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अब तक क्यों नहीं हो पाया ईईजेड का पूरा उपयोग?
हालांकि भारत के पास विशाल समुद्री क्षेत्र है, लेकिन गहरे समुद्र में मौजूद ट्यूना जैसी कीमती मछलियों का दोहन अब तक सीमित रहा है। वहीं, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया और यूरोपीय देश भारतीय महासागर से बड़ी मात्रा में ट्यूना मछली पकड़ते हैं।

नए नियमों से क्या बदलेगा?
ये नियम भारत को समुद्री उत्पादों के वैश्विक व्यापार में और मजबूत बनाएंगे। साथ ही, यह एक ऐसा मॉडल पेश करते हैं जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इससे न केवल मछुआरों को फायदा होगा, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की भी रक्षा होगी।

 

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